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जम्मू और कमीर के तीन वििाट क्षेत्रे में है जम्मू, कमीर और लाख क्षेत्रे में अत्यधिक र्गम से अत्यधिक ठण्ड हैं तब मौसम को परिवतर्न होता है।जम्मू और कमीर राज्य के वििाट जम्मू, और लाख के तीन क्षेत्रे के मौसम से बदलने के साथ ाामिल अत्यधिक र्गम और अत्यधिक ठण्ड के लिए हर क्षेत्र् अपनी अद्वितीय सुंदरता, सस्ंति, विरासत और पंरपराओ से समृद्व है ।

भारत के मानचित्र् पर एक रत्न गढित मुकुट ाुसोभित है के सदृय है। कमीर एक बहुमुखी हीरा है, मौसम के साथ अपने रगों को मौसम के अनुसार बदलता रहता है असधारण संुदरता जो हमेाा मौसम के साथ असधारण सुंदर रूप् मे बदलता रहता हैकमीर एक बहुमुखी हीरा है जो कि भारत के मानचित्र् पर एक रत्न जडि.त मुकूट के सदृय है जो हमेाा मौसम के साथ असधारण रूप से रंग बदलता रहता है।दो पर्वत श्रृखलाये, हिमालय और परि पचांल इस परिदृय को उत्तर से दक्षिण तक छेरे हुए है। मुगलो ने सही कहा की कमीर पृथ्वी पर स्वर्ग है। कमीर को दिल कहे जाने वाला श्रीनगर १७३ मीटर की ऊचाई पर स्थित है। कमीर में चार अलग मौसम है प्रत्येक अपने वििाट परिचय और आकार्ण जो बसंत, ग्रीम, ारद ऋतु और सदिर्यो में ामिल है।

तिब्बती पढार के पक्ष्चिमी छोर पर स्थित है। लाख उत्तर में ाक्तिााली कराकरम पर्वत श्रेणी के द्वारा और दक्षिण में हिमालय पर्वत से ?िारा हुआ है। लाख को परिदृय सदियो से हवा के कटाव से संाोधित हुआ है। इसकी ऊचाई ९ से २५ फीट तक है। लाख और जनासकर पर्वत श्रेणी तथा अन्य पर्वत श्रृखलाओ में चल रहा है। ॑॑टूटी चाँद की भूमि॑॑ और ॑॑अनंत की खोज की भूमि॑॑ इसे ठीक ही कहा जाता है। सदियो से लाख अनुप्रस्थ था करवां द्वारा वस्त्र्, मसाले, ग्लीचे इत्यादि के व्यापार के लिये पंजाब व कमीर से मध्य एिाया के दाकर्एण्ड और कोथन के ाहरो तक पहुचाने के लिए इसका उपयोग होता था।

जम्मू हिमाच्छवित पीर पंचाल पर्वत श्रृखंला के सामने स्थित है। जम्मू के परिर्वतन के निाान उत्तर मे हिमालय और दक्षिण में पंजाब के बीच मे है। यह िावालिक पहाडि़यो की अनुप्रस्थ है। और रावी तवी और चिनाब तीन नदियो द्वारा पकड़ा हुआ है। यह जम्मू और कमीर की सदिर्यो की राजधानी है।

जम्मू और कमीर राज्य प्रसद्वि है उसकी विविध सौदर्य जैसे हिल"स्टेान झीलो, अभयाख्यो, वन्य जीव पाकोर्, विरासत, कला और सस्ंकृति, वनस्पति एंव जीव जन्तु, प्राचीन धमोर्, सहासिक खेल। यह सुनिचित करने के लिए तीन क्षेत्रे की पेाका निम्नलिखित हैः

कमीरः" मुगल गडर्न, ाालीमार, निाांत और चमा ााहि, तुलीप मुख्य हील स्टेानः" गुलमार्ग, पहलगाम, सोनमार्ग, युसमर्ग आदि
भ्रमणः" अचावल, कोकेरनाग, अहरावल, बेरीनाग, दुर्ग इत्यादि
राट्रीय उधानः"डेसीग्राम, आद्रर्भुमियाः" होकरसर इत्यादि विर्रासतः" हरी पर्वत किला, ाकराचार्य मन्दिर, हजरतबल, जामा मस्जिद, बौद्ध ऎतिहासिक स्थलः" परिहारपोरा, हरवान, प्राचीन मन्दिरः" मात्तृन्ड़, मातन, पातन, आवन्तिपुरा, वोनियार आदि फारस की उत्कृट कला एवं िाल्य और मध्य एिाया का प्रभाव।सदिर्यो के दौरान प्रवासी पक्षीयो को देखना, लोक संगीत, कला प्रदरन, संग्रहालय आदि
तीथर् सिलः" अमरनाथ गुफा
लाखः" लेह ाहर, तेस्मो गोल्फा, महल, जामा मस्जिद, किले और महलः" ोय, बाज़गो स्तोक, बोद्ध बिहारः" थीकोय, स्ताकना, हेमिस, चेमरी, तकघेक, माथो, स्पीतुक, फयांग, लीकीर, अलची, रीजोग, लामायुरू, दरार्, जोजिला, खागला, चगंला आदि
?ााटीः" जनासकर, दरास और सुर कारगील, नुवरा लेह मेत्र्ेया बुद्व मुर्ति कारगील अति ऊचाई वाली झीलेः" पानगोनम, सो मोरी, लोवान आदि जनजातिया समुदायेः" ब्रोकपा आदि समारोह प्रत्येक मढ को समपिर्त है, उच्चतम चोटियाः" नुन और कुन कारगील
जम्मू मंन्दिरः" रा?ाुनाथ मन्दिर, बहु किला मन्दिर, आदि बाग"ए"बहु विरासतः" अमर महल, मुवारक मण्डी हिल स्टेानः" पटनी टाँप्, बदेरवाह झीलः" सनासर, मनसार तीथर् सिलः" माता बैंणव देवी कटरा ाुद्ध महादेव, गोरी कुण्ड मनतालाई, पुमण्डल, करीमची, िाव खोरी आदि।

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